मुख्यमंत्री ने प्रशासकीय सुधारों संबंधी अतिरिक्त मुख्य सचिव को सरकारी कामकाज 100 प्रतिशत ई-ऑफिस के द्वारा सुनिश्चित बनाने के लिए कहा

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चंडीगढ़, प्रांतीय प्रशासन के कामकाज में और अधिक कुशलता, पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के प्रयास के तौर पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज प्रशासकीय सुधारों संबंधी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को सरकार में सभी उपयोगकर्ताओं के लिए ई-ऑफिस प्रणाली लागू करके मुकम्मल डिजीटाईजेशन यकीनी बनाने के लिए कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि फिजिकल फाइलों की समूची प्रणाली को तुरंत ई-ऑफिस में बदल देना चाहिए, जिससे प्रशासकीय सुधारों की रूप-रेखा पर नागरिक केंद्रित सेवाओं को तेज़ी से मुहैया करवाने को यकीनी बनाया जा सके। उन्होंने उम्मीद ज़ाहिर की कि ई-ऑफिस प्रणाली अपनाने से सरकारी कामकाज निपटाने में अनावश्यक देरी को घटाया जा सकेगा, जिससे सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित बनाई जा सकेगी, जोकि आखिर में बहुत हद तक अक्षमताओं और भ्रष्टाचार को रोकेगा।
नए डिजिटल युग में कामकाज के तरीकों में हो रहे बदलाव के महत्व का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने 516 नागरिक केंद्रित सेवा केन्द्रों के नैटवर्क के द्वारा लोगों को लगभग 350 सेवाएं मुहैया करवा कर प्रशासन में और अधिक पारदर्शिता और कुशलता लाने के लिए वचनबद्ध है।
विचार-चर्चा में हिस्सा लेते हुए वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि पंजाब पहले औद्योगिक क्रांति में पिछड़ गया था और अब सूचना प्रौद्यौगिकी की क्रांति का मौका हथियाने का उपयुक्त मौका है और ई-ऑफिस को कारगर ढंग से लागू करके इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कारोबार और सरकारी सेवाओं में स्थापित पुराने तरीकों को नए तौर-तरीकों में बदलाव कर हमारे राज्य को डिजिटल तौर पर सशक्त समाज और ज्ञान आधारित आर्थिकता में बदलने की ज़रूरत है।
प्रशासकीय सुधारों के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिरूद्ध तिवाड़ी ने संक्षिप्त पेशकारी के द्वारा मुख्यमंत्री को विभाग के कामकाज संबंधी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विभाग का कार्य सॉफ्टवेयर डिवैल्पमैंट, हार्डवेयर की खरीद, सूचना तकनीक का बुनियादी ढांचा (नैटवर्क, बैंडविड्थ, डाटा सैंटर) में सहयोग, ऑनलाइन और सेवा केन्द्रों के द्वारा सार्वजनिक सेवा मुहैया करवाना, शिकायतों के निपटारे के अलावा अन्य जिम्मेदारियां भी निभाता है। इनमें आर.टी.आई. एक्ट और आर.टी.आई. कमिशन, सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना, लाल फीताशाही विरोधी एक्ट और प्रांतीय सलाहकार काऊंसिल की जिम्मेदारियां शामिल हैं।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने आगे बताया कि राज्य भर में 516 सेवा केंद्र काम कर रहे हैं, जो 31 विभागों में अलग-अलग सेवाएं देते हैं। सरकार द्वारा नागरिकों (जी2सी) को दी जाने वाली 332 सेवाओं में जन्म/मृत्सु प्रमाण पत्र, ड्राइविंग लायसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, मैरिज सर्टिफिकेट और हथियार सेवाएं शामिल हैं। कारोबारी आधारित सेवाएं (बी2सी) में फोटोकॉपी, कोरियर, लेमिनेशन, रेलवे टिकट बुकिंग और फाइल बनानी शामिल हैं। प्रशासकीय सुधार विभाग ने राजस्व के साझेदारी मॉडल के आधार पर सेवा केंद्र का काम दो सर्विस ऑप्रेटरों को दिया है। हाल ही में शुरू की गईं सेवाओं में सरबत सेहत बीमा योजना, फ़र्द सेवाएं, ई-कोर्ट फीस, सांझ केंद्र से सम्बन्धित सेवाएं, स्थानीय सरकार विभाग की सेवाएं जैसे कि प्रॉपरटी टैक्स इक_ा करना, रेहड़ी छोटी दुकान वालों की रजिस्ट्रेशन, पानी/सिवरेज बिल इकठ्ठा करने के अलावा निर्माण कामगारों के लिए श्रम विभाग की 41 एकीकृत सेवाएं शामिल हैं। कृषि, एन.आर.आई. दस्तावेज़ तस्दीक, गृह और राजस्व विभाग और मैडीकल शिक्षा, बिजली, स्कूल शिक्षा, आवास एवं शहरी विकास, स्थानीय सरकारें, तकनीकी शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग की नयी चिन्हित की गईं 192 सेवाएं प्रक्रिया अधीन हैं, जो कोई 31 मार्च 2022 तक शुरू करने की योजना है। श्री तिवाड़ी ने आगे बताया कि 62 विभागों/बोर्ड/निगमों के लिए शिकायत निवारण करने की प्रणाली अमल अधीन है।
‘डिजिटल पंजाब’ के अलग कदम के अंतर्गत ग़ैर-आपातकालीन सेवाओं के लिए यूनीफाईड स्टेट हेल्पलाइन नंबर 1100 शुरू किया गया है। टीकाकरण, बिस्तरों और मरीज़ों के प्रबंधन के अलावा कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और टैस्ट रिपोर्टों के लिए 63 लाख से अधिक बार कोवा ऐप डाउनलोड की गई। यह ऐप आरोग्य सेतु और इंडियन काऊंसिल ऑफ मैडीकल रिसर्च (आई.सी.एम.आर.) के साथ जुड़ी हुई थी।
इससे पहले मुख्य सचिव विनी महाजन ने बताया कि प्रशासकीय सुधार संबंधी विभाग नागरिक केंद्रित सेवाओं को समयबद्ध और निर्विघ्न बनाने के लिए सभी विभागों के साथ तालमेल रख रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब सिविल सचिवालय, 65 डायरैक्टोरेट और 55 बोर्ड और निगमों में ई-ऑफिस लागू हो चुका है। मौजूदा समय में 40,000 अधिकारी/कर्मचारी 4.5 लाख डिजिटल फाइलों पर काम कर रहे हैं।